अक्स
वो भी तो एक झूट ही है ...चलो झूट नही पर पूरा सच भी तो नही है आइना हमे ही दिखाता ज़रूर है पर क्या वो सच्च में हम ही होते हैं ...या बस एक परछाई
हाँ वो परछाई हमारा हिस्सा ज़रूर है पर हम तो नही है न
कितनी ही बार आईने के सामने जाते ही हम एक मुस्कुराता चेहरा बना लेते हैं वो चेहरा जो हम देखना चाहते हैं और दुनिया को दिखाना चाहते हैं
कुछ एइसा ही तस्वीरों में भी होता है.... वो भी हमारा ही एक अक्स होती हैं
Tuesday, November 18, 2008
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